धरमजयगढ़ के सभी मिनी पार्क और यात्री प्रतीक्षालय बदहाल, सुविधा के नाम पर सिर्फ ढांचा – धरमजयगढ़ में नगर पंचायत द्वारा बनाए गए मिनी पार्क और यात्री प्रतीक्षालय लोगों की सुविधा के बजाय अब परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। गांधी चौक का मिनी पार्क हो या नगर के अन्य सार्वजनिक स्थल—हर जगह हालात एक जैसे हैं। इन जगहों को सौंदर्यीकरण के नाम पर सिर्फ तारों से घेर दिया गया है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।मिनी पार्क सिर्फ दिखावे के लिएनगर के कई स्थानों पर मिनी पार्क बनाए गए थे, ताकि लोग कुछ देर विश्राम कर सकें और हरियाली का आनंद ले सकें। लेकिन हकीकत यह है कि इन पार्कों में न तो छायादार पेड़ हैं, न ही बैठने की कोई व्यवस्था। कई जगह तो ये पार्क कूड़े-कचरे के अड्डे बन चुके हैं।यात्री प्रतीक्षालयों में सुविधाओं का अभावबस स्टैंड और प्रमुख चौकों पर बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय भी अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। यात्रियों के लिए न बैठने की उचित व्यवस्था है, न ही छांव या सुरक्षा का इंतजाम। बारिश और धूप में लोगों को खुले में खड़े रहना पड़ता है, जिससे प्रतीक्षालयों का उद्देश्य ही विफल हो जाता है।नगरवासियों की नाराजगी – प्रशासन कब करेगा सुधार?स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पंचायत ने मिनी पार्क और प्रतीक्षालय बनाने में सिर्फ औपचारिकता निभाई है, लेकिन इनका रखरखाव नहीं किया जा रहा। अगर प्रशासन ने जल्द ही इनकी स्थिति में सुधार नहीं किया, तो यह सिर्फ बेकार ढांचे बनकर रह जाएंगे।नगरवासियों की मांग:मिनी पार्कों में बैठने की उचित व्यवस्था होछायादार वृक्ष लगाए जाएंयात्री प्रतीक्षालयों में पर्याप्त छांव और बैठने की सुविधा दी जाएनियमित सफाई और रखरखाव की व्यवस्था होअब देखना होगा कि नगर पंचायत इन समस्याओं पर कब तक ध्यान देती है और धरमजयगढ़ की जनता को सुविधाओं का लाभ कब तक मिलता है।मिनी पार्को में कुछ झूले शुरू में लगाये गये थे जो अब नदारद हैं !धरमजयगढ़ के मिनी पार्कों में सुविधाएं गायब, झूले भी हुए नदारद धरमजयगढ़ के मिनी पार्कों की स्थिति दिन-ब-दिन बदहाल होती जा रही है। नगर पंचायत द्वारा सौंदर्यीकरण के नाम पर इन पार्कों का निर्माण किया गया था, लेकिन आज ये पार्क सिर्फ नाम के लिए बचे हैं। शुरू में बच्चों के खेलने के लिए कुछ झूले लगाए गए थे, लेकिन अब वे भी नदारद हो चुके हैं।झूलों के बिना अधूरे पार्कशहर के कई मिनी पार्कों में शुरूआती दिनों में झूले और अन्य खेल सामग्री लगाई गई थी, जिससे बच्चे और परिवार यहां समय बिता सकते थे। लेकिन अब ज्यादातर पार्कों से ये झूले गायब हो चुके हैं या खराब हालत में पड़े हैं। इससे बच्चे निराश हो रहे हैं और पार्कों का उपयोग भी कम होता जा रहा है।सिर्फ नाम के लिए मिनी पार्कगांधी चौक समेत अन्य स्थानों पर बने मिनी पार्कों की स्थिति चिंताजनक है।हरियाली नदारद: घास और पौधों की देखरेख नहीं हो रही।बैठने की व्यवस्था नहीं: कुछ जगह बेंच थीं, लेकिन अब टूट-फूट चुकी हैं।साफ-सफाई की कमी: कई पार्क अब कूड़े-कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। नगरवासियों की मांग – रखरखाव हो या हटाया जाए स्थानीय लोग अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इन मिनी पार्कों का सही तरीके से रखरखाव किया जाए। अगर प्रशासन इसमें रुचि नहीं लेता, तो बेकार ढांचों को हटाकर उन जगहों का कोई बेहतर उपयोग किया जाए।नगर पंचायत से उम्मीद की जा रही है कि वह जल्द से जल्द इन पार्कों की दुर्दशा पर ध्यान दे और शहरवासियों को एक साफ-सुथरा, उपयोगी सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराए।
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