धरमजयगढ़ ब्लॉक के पुरुँगा क्षेत्र में प्रस्तावित अदानी समूह के भूमिगत कोयला खदान परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के मन में कई प्रश्न लगातार उभर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खदान भूमिगत होगी, तब भी जल, जंगल, ज़मीन, हाथियों का आवागमन, प्रदूषण और ग्राम–जीवन पर प्रभाव पूरी तरह कैसे टाला जा सकता है? क्या इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट रूप से ग्रामीणों के सामने रखे गए हैं?प्रमुख प्रश्न, जो गाँव में चर्चा का विषय बने हुए हैं
जब खदान के नीचे कोयला निकलेगा, तो क्या भूमिगत जल–स्तर प्रभावित नहीं होगा?
क्या यह सुनिश्चित है कि टन–दर–टन कोयला निकालने के बाद नीचे की भूगर्भीय संरचना खोखली होने से जलस्रोतों में बदलाव नहीं आएगा?
. जंगल में आवाजाही करने वाले हाथियों और अन्य वन्यजीवों पर असर कैसे नहीं पड़ेगा?
क्या यह प्रमाणिक रूप से बताया गया है कि भूमिगत कंपन, मशीनों की आवाज़, अंडरग्राउंड ब्लास्टिंग और मानव गतिविधियाँ वन्य–जीवन को प्रभावित नहीं करेंगी?
क्या गाँव की ज़मीन धँसने (Land Subsidence) की आशंका पूरी तरह ख़त्म मानी जाए?
क्या कोई स्वतंत्र (गैर–कंपनी) वैज्ञानिक संस्था ने सर्वे कर ग्रामीणों को आश्वस्त किया है? जंगल कटाई न होने का दावा क्या पर्याप्त है?
यदि सतह पर पेड़ नहीं कटेंगे, तो भी सड़क, बिजली, ड्रिलिंग, वेंटिलेशन शाफ़्ट, सुरक्षा चौकियाँ और भविष्य की खदान–गतिविधियाँ क्या वन–क्षेत्र को नहीं छुएँगी?
धूल, धुआँ और प्रदूषण का असर शून्य कैसे माना जाए?
क्या यह संभव है कि मशीनें, डंपर, मटेरियल हैंडलिंग, कोयला परिवहन और वायु–निकास प्रणाली शून्य प्रदूषण पर काम करें?
ग्रामीण पूछते हैं — यदि सब कुछ सुरक्षित है, तो फिर सारी तकनीकी जानकारी, खतरे और नियंत्रण–उपाय खुले मंच पर, सार्वजनिक रूप से, दस्तावेज़ सहित क्यों नहीं समझाए जाते? ग्रामीणों का कहना है कि “हम विकास और उद्योग के विरोधी नहीं हैं, लेकिन हमारी धरती, जंगल, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों पर सवाल खड़े हों तो जवाब भी साफ़ और सार्वजनिक होने चाहिए।” ग्रामीण यह भी मांग कर रहे हैं कि किसी मध्यस्थ के बजाय सीधे खुले मंच पर प्रशासन, विशेषज्ञ और कंपनी के अधिकारी संवाद करें। अदानी समूह की ओर से यह कहा जाता रहा है कि परियोजना रोजगार, विकास और स्थानीय सुविधाओं के विस्तार के अवसर लाएगी। कंपनी का दावा है कि भूमिगत खनन से “प्रभाव न्यूनतम” रहेंगे — हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे दावे नहीं, ठोस प्रमाण और लिखित जवाब चाहते हैं।

